मेरी सेक्स (प्रेम) यात्रा - eXBii
चलिए अगले अपडेट से पहले एक क्विक सर्वे हो जाये ताकि मुझे आप लोगों का टेस्ट पता लग सके-
आपको कौनसा सेशन अत्यधिक कामुक लगा?
१. आयशा की फिंगरिंग,
२. डॉली के संग थ्री-सम,
३. कजिन के संग ढलान पर रगडाई, मसलाई, फिर उसकी छुड़वाई, या
४. ज़रीन संग अननोन डार्क नाईट सेक्स.
प्लीज़ आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण होगी.सुबह बहुत लेट उठा.
कोंटिनेंटल ब्रेकफ़ास्ट के लिए होटल की मध्य लोबी में स्थित ‘अल-नखिल लाउंज’ मैं पहुंचा.
नाश्ते के दौरान मेरी नज़र स्वाभाविक रूप से चार-पांच अति सेक्सी सुंदरियों और उनसे घिरे एक शेख पर पड़ी. वो काफी हँस बोल रहे थे.
मैं नाश्ता खतम करके भी वहीँ बैठे बैठे उन्हें निहार रहा था.
वे जब उठ कर चले गए, तो मैं भी उठा और बाहर आने लगा. इस दौरान मुझे शेख जहाँ बैठा था वहाँ सोफे पर एक लाल शनील की पोटली नज़र आई. शायद वो शेख भूल गया था.
मैंने वो पोटली उठाई और तुरंत कर पार्किंग की ओर भागा. नीचे पोर्टिको में मुझे वो नज़र आया और मैंने उसे रोका.
उसने सुंदरियों को जाने का इशारा करके वो मेरे पास आया. जब मैंने उससे उस पोटली कि तस्दीक करा कर उसके हवाले की तो उसने लिटररी मुझे गले लगा लिया.
‘बिरादर, तुम नहीं जानते तुमने मुझे कितनी कीमती चीज़ लौटाई है. आज के ज़माने में भी तुम जैसे लोग होते हैं मैं सोच भी नहीं सकता था.’
उसने मुझे बताया कि उसमे कीमती डायमंड थे. मुझे उसने इनाम देने की पेशकश की जिसे मैंने विनम्रता से ठुकरा दिया. वो मेरा कायल हो गया.
‘बिरादर, मेरा नाम मोहम्मद बिन-ज़ायद अल-मख्तूम है और मेरा बहुत बड़ा केसिनो है दुबई में. अब तुम मेरे खास दोस्त और मेहमान हो. अब जब तक तुम यहाँ हो, देखो मैं तुम्हारी कैसी खिदमत करता हूं. चलो आओ लॉबी में बैठकर बातें करते हैं.’
उसने फोन पर ड्रायवर को कुछ देर वेट करने का बोल कर मुझसे मुखातिब हुआ.
‘दरअसल केसिनो के बेसमेंट में मेरा एस्कोर्ट सर्विस का सीक्रेट बिजनेस है. सारी दुनिया का चुनिन्दा और नायब हुस्न मैं यहाँ के हाई क्लास रईसों को उपलब्ध कराता हूं. एक हाई क्लास केटेगरी भी है जिसमे हफ्ते में एक बार हम किसी सेलेब्रिटी को आक्शन करते हैं. वो सिर्फ १०-१२ खास मेंबर के बीच ही होता है.’
‘तुम्हे एकदम मज़ा आ जायेगा क्योंकि बोलीवुड का बहुत हुस्न है मेरे यहाँ. और इस बार की आक्शन गर्ल भी इंडिया से आ रही है आज. परसों दिन में आक्शन है, तो कल दिन में वो फ्री रहेगी और दोस्त कल तुम और वो............’
ये सुन कर मेरे रोंगटे खड़े होने लगे. मेरी तो एकदम से लोटरी ही निकाल आई थी.
‘कौन है वो’ मैंने रोमांच से पूछा.
‘बिरादर, आक्शन गर्ल को हम बहुत सीक्रेट रखते हैं और सिर्फ विनर को ही बस उसके बारे में पता चलता है वो भी एक राउंड खतम होने के बाद. पहला राउंड तो हमारा विनर सोच सोच के ही मर जाता है कि आखिर ये सेलेब्रिटी कौन है.’
ये तो कल रात मैंने भी महसूस किया डार्क नाईट अननोन सेक्स करके.
‘तुम कल की छोडो बिरादर. तुम अभी चलो मेरे साथ. बोलीवुड की इस वक्त आठ सुंदरियां मौजूद है. जैसे चाहो वैसे एन्जॉय करो.’ और ये कहकर उसने मेरा हाथ थामा और अपनी मर्सीडीज़ मैं बैठा कर अपने केसिनो की ओर ले चला.केसिनो पहुँच कर मुझे वो अपने सीक्रेट बेसमेंट में ले गया.
एक बहुत बड़ा राऊंड रूम था जिसके बीचो बीच एक गोल स्टेज था और घेरे में बैठने की शानदार कुर्सियां लगी हुई थी.
मोहम्मद ने बताना शुरू किया कि किस तरह से आक्शन का खेल होता है यहाँ.......
'हमारे सभी सम्माननीय और रईस मेहमान दोपहर २ बजे तक यहाँ मौजूद कुर्सियों पर आकर अपना स्थान ले लेते हैं. ठीक २ बजे सभी लाइट्स बंद कर दी जाती है.’
‘धीमी आवाज़ में कामुक अरेबियन संगीत फिजां को रंगीन बनाता रहता है. हमारा एक आदमी स्टेज के पास माइक लेकर खेल शुरू करवाता है.’
‘मंच के बीचोबीच हमारी आक्शन सेलेब्रिटी निचे से एक लिफ्ट के द्वारा प्रकट होती है. एक बहुत ही मद्धिम रंगीन रोशनी उस पर पड़ती है.’
‘उसके चेहरे पर एक नकाब होता है कि उसे पहचाना ना जा सके. वो एक पारदर्शी गाउन में लिपटी हुई होती है जिससे उसके जिस्म का जर्रा जर्रा नुमाया होता है.’
तालियों से स्वागत के बीच उद्घोषक, अब उसके जिस्म की तमाम खूबियाँ मेहमानों को बताता है. वो सेलेब्रिटी फिर धीरे से अपना गाउन गिरा कर अपने शफ्फाक़ जिस्म की नुमाइश करते हुए विभिन्न कामुक पोज़ बनाती है.'
अब तक हम मंच के ऊपर पहुँच चुके थे. उसने आगे बताना शुरू किया....
'उद्घोषक अब बेस प्राइज से बोली शुरू करता है. कल की हमारी बोली १०० हज़ार दिरहम (पंद्रह लाख रूपये) से प्रारंभ होगी.
‘मेरा अनुमान है कि ये २०० से २५० हज़ार दिरहम तक जाएगी.’
‘बोली के दौरान एक व्यवस्था और रखी जाती है कि दस हज़ार दिरहम देकर कोई भी मेहमान उस सेलेब्रिटी को २ मिनट तक पास जाकर छू कर, देख कर उसके हुस्न को करीब से महसूस कर सकता है.’
‘अमूमन सभी १४-१५ मेहमान इस आप्शन को लेते हैं. इस दौरान उन्हें अपना हाथ उसके पूरे शरीर पर फिराने की आज़ादी होती है.’
‘हाँ वो उसका चेहरा नहीं देख सकता, योनी में अन्दर हाथ नहीं डाल सकता है और चून्चियों को सिर्फ आहिस्ता से सहला सकता है.’
हाथ तो किसी एक के ही लगेगी वो पर कम से कम कुछ तो मज़े सारे मेहमान लेकर ही जाते हैं.'
मैं सारी बातें सुनकर अचंभित हो उठा. कितना कामुक द्रश्य रहता होगा वो.
इतनी महंगी हसीना जिसके लिए बाकि सभी लोगों की KLPD हो जाती है वो कल मुझे मिलने वाली है ......ये सोच सोच कर मेरे रोमांच की कोई सीमा नहीं रही.
'मोहम्मद भाई, मैं आपका दिल से बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस लायक समझा और ऐसा नायाब तोहफा दे रहे हैं.'
'बिरादर, आपने तो मोहम्मद भाई को ही जीत लिया है, आपके लिए तो जितना भी करूँ वो कम है. '
इसी तरह से बातें करते हुए हम एक दुसरे हॉल में पहुँचते हैं जहाँ पर कुछ हसीनाएं सिर्फ छोटे से टॉप और स्किर्ट में गपशप कर रही थीं.
वहां पर याना गुप्ता और उदिता गोस्वामी भी थी और बाकी दुसरे मुल्कों की लग रही थी.
जैसे ही उन्होंने हमें आते देखा, सब की सब दौड़ कर मोहम्मद के इर्द गिर्द आकर चिपक कर खड़ी हो गई.
'चलो तुम सबको मेरे एक बहुत ही प्यारे मेहमान से मिलवाता हूँ, ये अभि भाई हैं, इंडिया से आयें हैं. आज आप सबको इनका खास ख्याल रखना है. और बिरादर ये मेरी प्यारी प्यारी गर्ल फ्रेंड्स हैं.'
और फिर बारी बारी से सबका परिचय करवाया. सब मुझसे गले मिल मिल कर अभिवादन करती रहीं.
’मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए उदिता मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.
मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.
फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
yl
Monday, 14 January 2013
बुर या चुत चूसने में सावधानियां -
बुर या चुत चूसने में सावधानियां - eXBii
कई बार लड़के किसी लड़की का बुर चूस कर उसका मज़ा उठाना चाहते हैं। दरअसल बुर चूसने मेंभी एक अलग प्रकार का आनंद है। लेकिन बुर चूसने के समय कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है।सबसे पहले लड़की की बुर के सभी बाल को सेफ्टी रेज़र से साफ़ कर ले। उसके बाद उसके बुर कोसाबुन से अच्छी तरह से धो डालें। साथ ही ये कन्फर्म हो लें की लड़की को कोई बिमारी तो नही है।अब लड़की को नंगा कर के अपने सामने लिटा दें। उसके दोनों पैरों को मोड़ कर आजू बाजू फैलादें। इस से लड़की की बुर साफ़ साफ़ दिखने लगेगी। अब उसके बुर को अपने हाथों से धीरे धीरेसहलाएं। थोडी देर में ही लड़की की बुर चिपचिपी हो जायेगी। अब अपने मुह को लड़की के चूची परले जा कर उसे चूसें। धीरे धीरे उसके बुर की तरफ़ अपना मुह ले जाएँ। अब उसके बुर को अपनेहोठो से चूमें। धीरे धीरे उसके चिपचिपे बुर का रस को ऊपर ऊपर स्वाद लें। अब अपने हाथ सेउसके बुर को पकड़ कर फैलाईये। अब आपको उसके अन्दर लालिमा दिखेगा। अब अपनी जीभ कोउस बुर के अन्दर डालिए और बुर के अन्दर का स्वाद लेने की कोशिश कीजिये। अब इस तरह सेमज़ा लीजिये मनो उसके बुर को आप खाना चाहते हों। पूरे मुह में उसके बुर को भर लीजिये। औरजी भर के चूसिये। थोडी देर में है लड़की के बुर से सफ़ेद माल निकलने लगेगा। उसे जीभ सेचाटिये। अगर लड़की बुर थोडी बास मार रही हो तो लड़की के बुर में शहद अथवा थोडी बियर डालदीजिये। अब लड़की के बुर का स्वाद का मज़ा लीजिये। १८ से 22 साल की लड़की का बुर का स्वाद बहूत मस्त रहता है. जब भी १८ से 22 साल की लड़की को चोदना हो तो उसका बुर को अवश्य ही चूसें। इन कम उम्र की लड़कियों का बुर आप बेझिझक चूस सकते हैं। बुर को तब तक चूसिये जब तक की बुर से माल न निकलने लगे। कम उमर की लड़कियों का माल आप पी भी सकते हैं। हरेकलड़की को सबसे ज्यादा मज़ा अपना बुर चटवाने में आता है. लड़की सदा के लिए आपकी गुलामबन जायेगी। एक बार लड़की का माल आप के चाटने से निकल गया तो फ़िर आप जैसा कहेंगेलड़की उस प्रकार से आपसे चुदवाने के लिए तैयार रहेगी। आप अपना लंड भी उस से चुसवा सकतेहैं।
कई बार लड़के किसी लड़की का बुर चूस कर उसका मज़ा उठाना चाहते हैं। दरअसल बुर चूसने मेंभी एक अलग प्रकार का आनंद है। लेकिन बुर चूसने के समय कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है।सबसे पहले लड़की की बुर के सभी बाल को सेफ्टी रेज़र से साफ़ कर ले। उसके बाद उसके बुर कोसाबुन से अच्छी तरह से धो डालें। साथ ही ये कन्फर्म हो लें की लड़की को कोई बिमारी तो नही है।अब लड़की को नंगा कर के अपने सामने लिटा दें। उसके दोनों पैरों को मोड़ कर आजू बाजू फैलादें। इस से लड़की की बुर साफ़ साफ़ दिखने लगेगी। अब उसके बुर को अपने हाथों से धीरे धीरेसहलाएं। थोडी देर में ही लड़की की बुर चिपचिपी हो जायेगी। अब अपने मुह को लड़की के चूची परले जा कर उसे चूसें। धीरे धीरे उसके बुर की तरफ़ अपना मुह ले जाएँ। अब उसके बुर को अपनेहोठो से चूमें। धीरे धीरे उसके चिपचिपे बुर का रस को ऊपर ऊपर स्वाद लें। अब अपने हाथ सेउसके बुर को पकड़ कर फैलाईये। अब आपको उसके अन्दर लालिमा दिखेगा। अब अपनी जीभ कोउस बुर के अन्दर डालिए और बुर के अन्दर का स्वाद लेने की कोशिश कीजिये। अब इस तरह सेमज़ा लीजिये मनो उसके बुर को आप खाना चाहते हों। पूरे मुह में उसके बुर को भर लीजिये। औरजी भर के चूसिये। थोडी देर में है लड़की के बुर से सफ़ेद माल निकलने लगेगा। उसे जीभ सेचाटिये। अगर लड़की बुर थोडी बास मार रही हो तो लड़की के बुर में शहद अथवा थोडी बियर डालदीजिये। अब लड़की के बुर का स्वाद का मज़ा लीजिये। १८ से 22 साल की लड़की का बुर का स्वाद बहूत मस्त रहता है. जब भी १८ से 22 साल की लड़की को चोदना हो तो उसका बुर को अवश्य ही चूसें। इन कम उम्र की लड़कियों का बुर आप बेझिझक चूस सकते हैं। बुर को तब तक चूसिये जब तक की बुर से माल न निकलने लगे। कम उमर की लड़कियों का माल आप पी भी सकते हैं। हरेकलड़की को सबसे ज्यादा मज़ा अपना बुर चटवाने में आता है. लड़की सदा के लिए आपकी गुलामबन जायेगी। एक बार लड़की का माल आप के चाटने से निकल गया तो फ़िर आप जैसा कहेंगेलड़की उस प्रकार से आपसे चुदवाने के लिए तैयार रहेगी। आप अपना लंड भी उस से चुसवा सकतेहैं।
हैंडप्रैक्टिस (हस्तमैथुन) -
हैंडप्रैक्टिस (हस्तमैथुन) - eXBii
हस्तमैथुन करने से मन के अंदर हीन भावना पैदा हो जाती है। इस क्रिया को करने के बाद हस्तमैथुन करने वाला यह सोचता है कि वह इस प्रकार की गलती दुबारा कभी नहीं करेगा परन्तु वह पुरुष अपने मन को काबू न रख पाने की वजह से पुनः हस्तमैथुन की क्रिया करने को मजबूर हो जाता है और इस तरह से हीनभावना के शिंकजे में फंस जाता है। इस रोग को एंजाएटी न्यूरोसिस के नाम से भी जाना जाता है।
हस्तमैथुन करने से मन के अंदर हीन भावना पैदा हो जाती है। इस क्रिया को करने के बाद हस्तमैथुन करने वाला यह सोचता है कि वह इस प्रकार की गलती दुबारा कभी नहीं करेगा परन्तु वह पुरुष अपने मन को काबू न रख पाने की वजह से पुनः हस्तमैथुन की क्रिया करने को मजबूर हो जाता है और इस तरह से हीनभावना के शिंकजे में फंस जाता है। इस रोग को एंजाएटी न्यूरोसिस के नाम से भी जाना जाता है।
Sunday, 13 January 2013
Wednesday, 2 January 2013
Monday, 31 December 2012
फिर तेरी कहानी याद आई - Pfir Teri Kahani Yaad Ayee | hindi sex stories
फिर तेरी कहानी याद आई - Pfir Teri Kahani Yaad Ayee | hindi sex stories
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सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपनी कहानी या आप बीती बताने से पहले मैं स्वय का परिचय देना उचित समझता हूँ। मेरा नाम अरिन्दम है, मैं कोलकाता से हूँ। मैं विज्ञान में ग्रेजुएट हूँ।
कोई हादसा बताने से पहले उसका वातावरण और परिस्थितियां बताना आव्श्यक होता है, नहीं तो कहानी समझने में परेशानी होती है।
ये उस समय की बात है जब मैंने अपनी सीनीयर सेकेन्ड्री की परीक्षा दे कर कॉलेज में दाखिल हो चुका था।
मैं एक किराये के मकान में रहता था जो मेरे मौसा का ही था। हमारा खुद का मकान तब तक बन कर तैयार नहीं हुआ था। इस मकान में हम तीन लोग रहते थे। मैं पापा और मां दूसरी मंजिल पर रहते थे और मौसाजी चौथे फ़्लोर पर रहते थे। मौसा का रिश्ता हमारे से करीब का रिश्ता था। मौसा की बेटी मुझसे दो साल छोटी थी। उसके साथ मेरा ताल मेल अच्छा था। वो मेरी बहन भी थी और एक अच्छी दोस्त भी थी।
मैं उसे अपनी दिल की कर एक बात बताता था। वो मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। पिन्की रूपा की करीब की सहेली थी मतलब बेस्ट फ़्रेन्ड थी, जो रूपा के साथ एक ही क्लास में पढती थी। पिन्की बहुत खूबसूरत थी ये तो मैं नहीं कहूंगा। लेकिन उसमे कोई बात थी, कोई कशिश थी जो मेरे दिल को छू जाती थी। स्कूल से छूटने के बाद वो रोज ही मिलने के लिये हमारे अपार्टमेन्ट में आती थी, क्यूंकि रूपा के साथ रिश्ता बहुत अच्छा था। हम तीनो ही कभी कभी मूड होने पर खूब गप्पे मारते थे। कभी मौका मिलने पर मैं उन दोनो के साथ सिनेमा देखने भी जाता था।
इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं पिन्की के साथ खुल कर बात नहीं कर पाता था। धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा था कि मैं उसे प्यार करने लगा हूँ। मैं अपने दिल की बात पिन्की को बताऊ, उससे पहले मैंने रूपा से पूछ लेना उचित समझा। इसलिये एक दिन मैंने साहस करके अपने दिल की बात रूपा को बता दी। पहले तो वो सुन कर हंस पड़ी, फिर सम्भलते हुये बोली - ये बहुत ही अच्छी बात है। फिर उसी से मुझे पता चला कि पिन्की भी मेरे बारे में रूपा से पूछताछ करती है। रूपा ने मुझे खुद ही आगे बढ कर प्यार का इजहार करने की सलाह दी।
उसने बताया कि ये काम तो वो भी कर सकती है लेकिन मेरे स्वयं को पिन्की को जाकर बताने से इसका असर बहुत अच्छा होगा। रूपा की सलाह के मुताबिक मैंने एक दिन अपनी हिम्मत जुटाई और हमारे अपार्टमेन्ट के नीचे जाकर खड़ा हो गया और फिर पिन्की के आने का इन्तज़ार करने लगा। पर हाय रे दिल ! मैंने जैसे ही पिन्की को देखा मेरी जबान सूखने लगी, तालू से चिपक कर रह गई। पसीना निकल पड़ा। अब तो वो मेरे बिलकुल नजदीक आ चुकी थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। मेरी हालत देख कर पिन्की हंस पड़ी और नीचे खड़े होने की वजह पूछने लगी।
मुझे पता था कि ये प्यार के इजहार करने का सुनहरा मौका था। लेकिन मैं अन्दर से इतना बौखलाया हुआ था कि मैंने अपना यह सुनहरा मौका गवां दिया। मेरे मुख से निकल पड़ा - वो ,मेरा एक दोस्त आने वाला है इसलिये मैं उसके इन्तज़ार में नीचे खड़ा हूँ।
मेरे हकला कर बोलने से पिन्की फिर से एक बार और हंस पड़ी। मेरी हालत ये थी कि मैं तो अपनी तक भी उससे नहीं मिला पा रहा था।
मैंने बाद में रूपा को जो जो हुआ था सब बता दिया। उसे भी एक बार तो हंसी आ गई। फिर बोली उसे ये बात पता है, पिन्की ने उसे ये सब खुद बताया था। मुझे बेहाल देख कर रूपा ने फिर से कोशिश करने की सलाह दी।
देखते देखते तीन महिना गुज़र गया लकिन मैं हिम्मत नहीं जुटा पाया। इसी दौरान हमारा खुद का मकान पूरा बन चुका था। हम लोग नये घर में जाने की तैयारी कर रहे थे। एक रविवार के दिन मैं, मां, रूपा मौसा और मौसी मिलकर घर का कुछ सामान और गृह प्रवेश काकुछ सामान भी लेकर नये वाले घर में गये। पापा हर रविवार को दादा, दादी, चाचा और चाची से मिलने के लिये अपने गांव जाया करते थे, इसलिये वो हमारे साथ नहीं थे।
उस रविवार को मेरे घर पर मेरा एक दोस्त आने वाला था, इसलिये मैं सामान रख कर जल्दी ही वहां से निकल गया था। तभी यकायक मेरे मन में एक ख्याल आया कि रूपा और मौसी का तो नये घर में आने का कार्यक्रम तो सवेरे हू बना था। पिन्की को तो ये पता नहीं था। वो तो हर दिन की तरह आज भी रूपा से मिलने जरूर आयेगी। इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना है। मैंने अपने दोस्त को फोन कर दिया कि मुझे आज नये घर मेजाना है इसलिये सोम वार को आना।
घर पहुंचते ही मुझे लगा कि यh मौका सुनहरा है। मैं ये मौका मिलने से बहुत रोमांचित होने लगा था। मौका को हाथ में लेने के लिये और प्यार का इजहार करने लिये मैं अपने आपको अलग ढंग से तैयार भी करने लगा। लेकिन जैसे ही पिन्की के आने का समय नजदीक आने लगा मेरा कोंफ़ीडेन्स बढने के बजाय डगमगाने लगा। इसी समय किसी के ऊपर आने की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे के होल पर आंख लगा दी। देखा तो पिन्की रूपा से मिलने के लिये ऊपर ही आ रही थी। जैसे ही वो ऊपर चली गई तो मैं अपना दरवाजा खोल कर उसके लौटने का इन्तज़ार करने लगा।
कुछ समय बाद वो नीचे उतर कर आई तो मुझे देख कर उसने मुझे रूपा के बारे में पूछा। तो मैंने उसे कि वो मेरे पापा और मम्मी के साथ नये घर में गई हुई है। पिन्की जैसे ही पीछे मुड़ कर लौट जाने के लिये मुड़ी तो मैंने उसे कहा कि वो मेरे घर पर रूपा का इन्तज़ार कर ले। पहले तो ना करने लगी, पर मैंने उसे थोरा सा जोर दिया तो वो मान गई।
घर में घुसने के बाद मैंने उसे सोफ़ा पर बैठा दिया और खुद भी उसके सामने बैठ गया। पहले तो हम चुपचाप ही बैठे रहे, वो भी खामोश थी और मैं भी । फिर पिन्की ने ही पूछा कि मैं खामोश क्यू बैठा हूँ। जवाब में मैं हिचकिचा गया और मुझसे कोई जवाब नहीं देते बना।
कुछ देर बाद उसने मुझे एक गिलास पानी के लिये कहा। मैं उठ कर पानी लेने चला गया और मन ही मन में सोचा कि जब वो पानी पीने के बाद गिलास वापस देगी तो मैं उसका हाथ पकड़ लूंगा और प्यार का इजहार कर दूंगा। फिर मैंने वैसा ही किया और गिलास लौटाते समय मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और मैंने उसे प्यार का इजहार कर दिया। इसके बाद हामरी बीच की बातचीत कुछ इस तरह से हुई।
मैं : पिन्की, मैं तुम से प्यार करता हूँ। क्या तुम भी मुझ से प्यार करती हो?
पिन्की : पता नहीं
मैं : देखो तुम कुछ तो बोलो ,तुम तो मुझे जानती हो, इस लिये प्लीज जो भी कहना हो मुझे बता दो।
यह बात सुनकर वो कुछ देर तक खमोश रही ओर उसके बाद उसने मेरे मन की बात ली और फिर वो मान गई। उसने बताया कि वो भी मुझसे प्यार करती है।
उसके बाद मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसके होंठो को चूमने लगा। पांच मिनट तक हम एक दूसरे को जोश के साथ चूमते रहे। फिर मुझे ख्याल आया कि हमारे रूम की खिड़की खुली है। इसलिये मैं पिन्की को लेकर बेड रूम में चला गया।
पिन्की शर्माती और सकुचाती सी मेरे साथ चल पड़ी। मैंने उसे बेड पर लेटा दिया। वो झिझकती हुई बेड पर लेट गई। मैं भी धीरे से उसकी बगल में लेट गया। वो शर्मा कर मेरे से लिपट गई और मेरी छाती पर उसने अपना मुँह छुपा लिया। मैंने उसका चेहरा ऊपर करके उसे चूमना शुरू कर दिया था। उसकी सांसे उत्तेजना के मारे जोर जोर से चलने लगी थी। मैं समझ गया था कि वो भी मेरी तरह गरम हो चली है। मेरा लण्ड भी उसे चोदने के बेताब हो चला था। उसे खुली किताब की देख कर मेरा मन उसे चोदने को हो उठा । पर तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी। मैं चौंक गया और झटपत उठ गया। पापा के लौटने का समय हो गया था। वो असंजस निगाहों से मुझे देखने लगी कि ये क्या हो गया । मैंने पिन्की को समझा दिया। हमारे प्यार का सफ़र बीच में ही रुक गया।
उस दिन के बाद मैं और पिन्की छुप छुप कर घूमने जाया करते थे। कभी कभी रूपा भी हमारे साथ हो लेती थी।
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सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपनी कहानी या आप बीती बताने से पहले मैं स्वय का परिचय देना उचित समझता हूँ। मेरा नाम अरिन्दम है, मैं कोलकाता से हूँ। मैं विज्ञान में ग्रेजुएट हूँ।
कोई हादसा बताने से पहले उसका वातावरण और परिस्थितियां बताना आव्श्यक होता है, नहीं तो कहानी समझने में परेशानी होती है।
ये उस समय की बात है जब मैंने अपनी सीनीयर सेकेन्ड्री की परीक्षा दे कर कॉलेज में दाखिल हो चुका था।
मैं एक किराये के मकान में रहता था जो मेरे मौसा का ही था। हमारा खुद का मकान तब तक बन कर तैयार नहीं हुआ था। इस मकान में हम तीन लोग रहते थे। मैं पापा और मां दूसरी मंजिल पर रहते थे और मौसाजी चौथे फ़्लोर पर रहते थे। मौसा का रिश्ता हमारे से करीब का रिश्ता था। मौसा की बेटी मुझसे दो साल छोटी थी। उसके साथ मेरा ताल मेल अच्छा था। वो मेरी बहन भी थी और एक अच्छी दोस्त भी थी।
मैं उसे अपनी दिल की कर एक बात बताता था। वो मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। पिन्की रूपा की करीब की सहेली थी मतलब बेस्ट फ़्रेन्ड थी, जो रूपा के साथ एक ही क्लास में पढती थी। पिन्की बहुत खूबसूरत थी ये तो मैं नहीं कहूंगा। लेकिन उसमे कोई बात थी, कोई कशिश थी जो मेरे दिल को छू जाती थी। स्कूल से छूटने के बाद वो रोज ही मिलने के लिये हमारे अपार्टमेन्ट में आती थी, क्यूंकि रूपा के साथ रिश्ता बहुत अच्छा था। हम तीनो ही कभी कभी मूड होने पर खूब गप्पे मारते थे। कभी मौका मिलने पर मैं उन दोनो के साथ सिनेमा देखने भी जाता था।
इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं पिन्की के साथ खुल कर बात नहीं कर पाता था। धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा था कि मैं उसे प्यार करने लगा हूँ। मैं अपने दिल की बात पिन्की को बताऊ, उससे पहले मैंने रूपा से पूछ लेना उचित समझा। इसलिये एक दिन मैंने साहस करके अपने दिल की बात रूपा को बता दी। पहले तो वो सुन कर हंस पड़ी, फिर सम्भलते हुये बोली - ये बहुत ही अच्छी बात है। फिर उसी से मुझे पता चला कि पिन्की भी मेरे बारे में रूपा से पूछताछ करती है। रूपा ने मुझे खुद ही आगे बढ कर प्यार का इजहार करने की सलाह दी।
उसने बताया कि ये काम तो वो भी कर सकती है लेकिन मेरे स्वयं को पिन्की को जाकर बताने से इसका असर बहुत अच्छा होगा। रूपा की सलाह के मुताबिक मैंने एक दिन अपनी हिम्मत जुटाई और हमारे अपार्टमेन्ट के नीचे जाकर खड़ा हो गया और फिर पिन्की के आने का इन्तज़ार करने लगा। पर हाय रे दिल ! मैंने जैसे ही पिन्की को देखा मेरी जबान सूखने लगी, तालू से चिपक कर रह गई। पसीना निकल पड़ा। अब तो वो मेरे बिलकुल नजदीक आ चुकी थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। मेरी हालत देख कर पिन्की हंस पड़ी और नीचे खड़े होने की वजह पूछने लगी।
मुझे पता था कि ये प्यार के इजहार करने का सुनहरा मौका था। लेकिन मैं अन्दर से इतना बौखलाया हुआ था कि मैंने अपना यह सुनहरा मौका गवां दिया। मेरे मुख से निकल पड़ा - वो ,मेरा एक दोस्त आने वाला है इसलिये मैं उसके इन्तज़ार में नीचे खड़ा हूँ।
मेरे हकला कर बोलने से पिन्की फिर से एक बार और हंस पड़ी। मेरी हालत ये थी कि मैं तो अपनी तक भी उससे नहीं मिला पा रहा था।
मैंने बाद में रूपा को जो जो हुआ था सब बता दिया। उसे भी एक बार तो हंसी आ गई। फिर बोली उसे ये बात पता है, पिन्की ने उसे ये सब खुद बताया था। मुझे बेहाल देख कर रूपा ने फिर से कोशिश करने की सलाह दी।
देखते देखते तीन महिना गुज़र गया लकिन मैं हिम्मत नहीं जुटा पाया। इसी दौरान हमारा खुद का मकान पूरा बन चुका था। हम लोग नये घर में जाने की तैयारी कर रहे थे। एक रविवार के दिन मैं, मां, रूपा मौसा और मौसी मिलकर घर का कुछ सामान और गृह प्रवेश काकुछ सामान भी लेकर नये वाले घर में गये। पापा हर रविवार को दादा, दादी, चाचा और चाची से मिलने के लिये अपने गांव जाया करते थे, इसलिये वो हमारे साथ नहीं थे।
उस रविवार को मेरे घर पर मेरा एक दोस्त आने वाला था, इसलिये मैं सामान रख कर जल्दी ही वहां से निकल गया था। तभी यकायक मेरे मन में एक ख्याल आया कि रूपा और मौसी का तो नये घर में आने का कार्यक्रम तो सवेरे हू बना था। पिन्की को तो ये पता नहीं था। वो तो हर दिन की तरह आज भी रूपा से मिलने जरूर आयेगी। इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना है। मैंने अपने दोस्त को फोन कर दिया कि मुझे आज नये घर मेजाना है इसलिये सोम वार को आना।
घर पहुंचते ही मुझे लगा कि यh मौका सुनहरा है। मैं ये मौका मिलने से बहुत रोमांचित होने लगा था। मौका को हाथ में लेने के लिये और प्यार का इजहार करने लिये मैं अपने आपको अलग ढंग से तैयार भी करने लगा। लेकिन जैसे ही पिन्की के आने का समय नजदीक आने लगा मेरा कोंफ़ीडेन्स बढने के बजाय डगमगाने लगा। इसी समय किसी के ऊपर आने की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे के होल पर आंख लगा दी। देखा तो पिन्की रूपा से मिलने के लिये ऊपर ही आ रही थी। जैसे ही वो ऊपर चली गई तो मैं अपना दरवाजा खोल कर उसके लौटने का इन्तज़ार करने लगा।
कुछ समय बाद वो नीचे उतर कर आई तो मुझे देख कर उसने मुझे रूपा के बारे में पूछा। तो मैंने उसे कि वो मेरे पापा और मम्मी के साथ नये घर में गई हुई है। पिन्की जैसे ही पीछे मुड़ कर लौट जाने के लिये मुड़ी तो मैंने उसे कहा कि वो मेरे घर पर रूपा का इन्तज़ार कर ले। पहले तो ना करने लगी, पर मैंने उसे थोरा सा जोर दिया तो वो मान गई।
घर में घुसने के बाद मैंने उसे सोफ़ा पर बैठा दिया और खुद भी उसके सामने बैठ गया। पहले तो हम चुपचाप ही बैठे रहे, वो भी खामोश थी और मैं भी । फिर पिन्की ने ही पूछा कि मैं खामोश क्यू बैठा हूँ। जवाब में मैं हिचकिचा गया और मुझसे कोई जवाब नहीं देते बना।
कुछ देर बाद उसने मुझे एक गिलास पानी के लिये कहा। मैं उठ कर पानी लेने चला गया और मन ही मन में सोचा कि जब वो पानी पीने के बाद गिलास वापस देगी तो मैं उसका हाथ पकड़ लूंगा और प्यार का इजहार कर दूंगा। फिर मैंने वैसा ही किया और गिलास लौटाते समय मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और मैंने उसे प्यार का इजहार कर दिया। इसके बाद हामरी बीच की बातचीत कुछ इस तरह से हुई।
मैं : पिन्की, मैं तुम से प्यार करता हूँ। क्या तुम भी मुझ से प्यार करती हो?
पिन्की : पता नहीं
मैं : देखो तुम कुछ तो बोलो ,तुम तो मुझे जानती हो, इस लिये प्लीज जो भी कहना हो मुझे बता दो।
यह बात सुनकर वो कुछ देर तक खमोश रही ओर उसके बाद उसने मेरे मन की बात ली और फिर वो मान गई। उसने बताया कि वो भी मुझसे प्यार करती है।
उसके बाद मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसके होंठो को चूमने लगा। पांच मिनट तक हम एक दूसरे को जोश के साथ चूमते रहे। फिर मुझे ख्याल आया कि हमारे रूम की खिड़की खुली है। इसलिये मैं पिन्की को लेकर बेड रूम में चला गया।
पिन्की शर्माती और सकुचाती सी मेरे साथ चल पड़ी। मैंने उसे बेड पर लेटा दिया। वो झिझकती हुई बेड पर लेट गई। मैं भी धीरे से उसकी बगल में लेट गया। वो शर्मा कर मेरे से लिपट गई और मेरी छाती पर उसने अपना मुँह छुपा लिया। मैंने उसका चेहरा ऊपर करके उसे चूमना शुरू कर दिया था। उसकी सांसे उत्तेजना के मारे जोर जोर से चलने लगी थी। मैं समझ गया था कि वो भी मेरी तरह गरम हो चली है। मेरा लण्ड भी उसे चोदने के बेताब हो चला था। उसे खुली किताब की देख कर मेरा मन उसे चोदने को हो उठा । पर तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी। मैं चौंक गया और झटपत उठ गया। पापा के लौटने का समय हो गया था। वो असंजस निगाहों से मुझे देखने लगी कि ये क्या हो गया । मैंने पिन्की को समझा दिया। हमारे प्यार का सफ़र बीच में ही रुक गया।
उस दिन के बाद मैं और पिन्की छुप छुप कर घूमने जाया करते थे। कभी कभी रूपा भी हमारे साथ हो लेती थी।
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